Monday, 13 August 2007

सबप्राइम लेंडिंग सिस्टम : जटिलता में छिपी घातकता

भारत में अच्छी खरीफ फसल कि आशा कर रहे कमोडिटी मार्केट और सब प्राइम संकट से स्टॉक मार्केट मे आये करेक्शन के माहौल के बीच इस ब्लॉग का प्रारम्भ किया जा रह है।

सबप्राइम लेंडिंग सिस्टम क्या है ? यहीं से शुरूआत करते हैं।

सबप्राइम मोर्गेज शब्दावली बड़े पैमाने पर फैले उस ऋण बाज़ार या लेंडिंग मार्केट का हिस्सा है जिसे सबप्राइम लेंडिंग मार्केट कहते हैं इसमे सबप्राइम कार लोन, सबप्राइम क्रेडिट कार्ड्स आदि शामिलहैं ।सबप्राइम मोर्गेज संकट ऐसी जटिल व्यवस्था के कारण खड़ा हुआ है जिसमे हाऊसिंग लोन लेने के इच्छुक ‘ख़राब क्रेडिट रेटिंग लोगों को बहुत ऊंची ब्याज दर पर किसी ऋणदाता द्वारा ऋण दिया जता है। यही ऊंची ब्याज दर सबप्राइम ब्याज दर कहलाती है।‘खराब रेटिंग उन लोगों को दी जाती है, ऋण वापासी के समय जिनके डिफाल्ट करने कि संभावना मजबूत होती है।

बाज़ार में ऊंचे लाभ कमाने की इच्छा में ऊंचा जोखिम उठाने वालों की कमी नहीं है। ऐसे ही कई लेंडर या एन्ट्रेंप्यूनर कुछ बैंको से साधारण प्रचलित ब्याज दरों पर ऋण लेकर खराब रेटिंग वाले लोगों को ऋण देते हैं।फिर इन बैंको से लिए ऋण को चुकाने के लिए ऐसे एन्टेप्युनर ने एक नयी प्रणाली विकसित की है। एन्ट्रेंप्यूनर द्वारा बैंकों से ली गयी राशि के समान राशि को सिक्युरिटीज या प्रतिभूति की तरह ‘ मोर्गेज बेक॒ड सिक्यूरिटी’ [एम बी एस] के रुप में कई निवेशकों को बेचता है। भारी जोखिम उठाते हुये ऊंचे लाभ की आशा में निवेशकों द्वारा एम बी एस में निवेश किया जाता है. निवेश से प्राप्त राशि से बैंक का ऋण एन्ट्रेंप्यूनर चुका देता है. जबकि हाऊसिंग लोन लेने वाले लोगों से प्राप्त किश्तों के आधार पर निवेशकों को ऊंचे रिट्र्न्स दिए जाते हैं.

उपरोकत व्यवस्थाओं के समांतर ऋण की रिफायनेंसिंग भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है। सबप्राइम व्यवस्थाओं के तहत लिए गए ऋण पर शुरुआती वर्षों मैं तो ब्याज दर बहुत कम होती है किन्तु बाद के वर्षों के लिए बहुत ऊंची हो जाती है। ऐसी परिस्थिति मैं कमजोर रैटिंग वाले लोग ऋण की रिफायनेंसिंग करवाना चाहते हैं।प्रगति करते रीयल एस्टेट बाजार में तो यह सरल है किन्तु अर्थव्यवस्था मैं बढ़ती ब्याज दरों और रीयल एस्टेट की गिरती कीमतों के कारण ऋण की किश्तें भरना कठिन हो जाता है। किश्त रुकने से एम बी एस के निवेशकों के रिट्र्न्स रूक जाते हैं।निवेशकों को भुगतान करने मैं असमर्थ एन्ट्रेंप्यूनर को बैंकरप्सी के लिए एप्लीकेशन तक देने की नौबत आ सकती है.

इस तरह सबप्राइम लेंडिंग के फेल होने कि दशा में वित्तीय प्रणाली मे भारी हलचल होती है. जैसा कि वर्तमान मै हो रहा है.एन्ट्रेंप्यूनर की विश्व के विभिन्न देशों मे उपस्थिति के अनुसार यह संकट विश्व स्तर पर फैलता जा रहा है।

1 comment:

Anonymous said...

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